साइबर सुरक्षा को लेकर अमेरिकी प्रशासन हुआ सख्त


हाल ही में एक नई साइबर सुरक्षा घटना ने अमेरिका में खलबली मचा दी है। चीनी हैकर्स ने एक अमेरिकी कम्युनिकेशन कंपनी के डेटा में सेंध लगाई है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। यह हमला तब हुआ जब प्रशासन को चीनी हैकिंग के तरीकों की जानकारी मिली और इस बार एक और पीड़ित कंपनी की पहचान की गई। साइबर और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ऐनी न्यूबर्गर ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिकी प्रशासन ने कंपनियों को उनके नेटवर्क में चीनी हैकिंग के तरीकों के बारे में सूचित किया था। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक इस हमले का शिकार होने वाली कंपनियों की संख्या नौ हो गई है। इस जानकारी के सामने आने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों की टेंशन और बढ़ गई है, क्योंकि यह एक बड़ा साइबर हमला था। यह हैकिंग हमला चीनी हैकिंग ग्रुप से संबंधित माना जा रहा है, जो पहले भी अमेरिकी कंपनियों और सरकारी संस्थाओं पर हमले कर चुका है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस ग्रुप के द्वारा किए गए हमले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बताया है। पिछले कुछ सालों में, चीन पर कई बार आरोप लग चुके हैं कि वह साइबर हमलों के जरिए अन्य देशों की संवेदनशील जानकारी चुराता है और अपनी राजनीतिक और आर्थिक ताकत बढ़ाने के लिए इसका उपयोग करता है। अमेरिका में साइबर सुरक्षा के मामले में यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई बार चीन पर आरोप लग चुके हैं कि उसने अमेरिका और अन्य देशों के डेटा को हैक करके उन्हें नुकसान पहुंचाया है। अमेरिकी प्रशासन अब इस प्रकार के हमलों को गंभीरता से ले रहा है और इसके लिए कड़ी सुरक्षा उपायों की योजना बना रहा है। इस घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि साइबर सुरक्षा अब किसी भी देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। सरकारें और कंपनियां इस खतरे से निपटने के लिए नए तरीके खोज रही हैं, लेकिन चीनी हैकर्स की बढ़ती ताकत ने एक नई समस्या खड़ी कर दी है। इस हमले के बाद, अमेरिकी प्रशासन को यह समझ में आया कि साइबर सुरक्षा को लेकर और भी सख्त कदम उठाने की जरूरत है। यह घटना अमेरिकी सरकार और कंपनियों के लिए एक चेतावनी है कि उन्हें अपने डेटा सुरक्षा उपायों को और मजबूत बनाना होगा।

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